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Kisan Yojana

बाजार भेजने से पूर्व केले को कैसे तैयार करें की मिले अधिकतम लाभ?

बाजार भेजने से पूर्व केले को कैसे तैयार करें की मिले अधिकतम लाभ?

आभासी तने से केले की कटाई के उपरांत , केले को बंच से अलग अलग हथ्थे में अलग करते है। इसके बाद इन हथ्थों को फिटकरी के पानी की टंकी में डालें @ 1 ग्राम फिटकरी प्रति 2.5 लीटर पानी की दर से मिलाते है। केले के इन हथ्थों को लगभग 3 मिनट के लिए डुबाने के बाद निकल लें। फिटकरी के घोल की वजह से केले के छिलकों के ऊपर के प्राकृतिक मोम हट जाती है एवं साथ साथ फल के ऊपर लगे कीड़ों के कचरे भी साफ हो जाते हैं। यह एक प्राकृतिक कीटाणुनाशक के रूप में कार्य करता है। इसके बाद दूसरे टैंक में एंटी फंगल लिक्विड हुवा सान (Huwa San), जिसके अंदर लिक्विड सिल्वर कंपोनेंट्स के साथ हाइड्रोजन पेरोक्साइड होता है जो एंटीफंगल के रूप में काम करता है,जो फंगस को बढ़ने नहीं देता है।

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हुवा-सैन क्या है?

हाइड्रोजन पेरोक्साइड और सिल्वर स्टेबलाइजर के संयोजन की प्रक्रिया दुनिया भर में अद्वितीय है और मूल हुवा-सैन तकनीक पर आधारित है, जिसे पिछले 15 वर्षों में रोम टेक्नोलॉजी में और विकसित किया गया था।

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यह तकनीक अद्वितीय है क्योंकि पेरोक्साइड को स्थिर करने के लिए एसिड जैसे किसी अन्य स्थिरीकरण एजेंट की आवश्यकता नहीं होती है। यह सब Huwa-San Technology के उत्पादों को गैर-अवशिष्ट और अत्यंत शक्तिशाली कीटाणुनाशक बनाता है।हुवा-सैन एक वन स्टॉप बायोसाइडल उत्पाद है जो बैक्टीरिया, कवक, खमीर, बीजाणुओं, वायरस और यहां तक ​​कि माइकोबैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी है और इसलिए इस उत्पादों को वाष्पीकरण के माध्यम से पानी, सतहों, औजारों और यहां तक ​​कि बड़े खाली क्षेत्रों को कीटाणुरहित करने के लिए कई क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है। पिछले 15 वर्षों में, हुवा-सैन उत्पादों का प्रयोगशाला पैमाने पर और दुनिया भर में कई फील्ड परीक्षणों पर बड़े पैमाने पर परीक्षण किया गया था। तकनीकी ज्ञान के साथ हुवा-सैन के व्यापक अनुप्रयोग स्पेक्ट्रम के भीतर जानकारी की प्रचुरता विश्वव्यापी सफलता की कुंजी रही है। Huwa-San को लैब और फील्ड टेस्ट सेटिंग्स में पूरी तरह से शोध और विकसित किया गया है ,यह पूर्णतया सुरक्षित है और ये नतीजतन, हुवा-सैन उत्पाद कीटाणुशोधन के लिए नवीनतम मानकों को पूरा करते हैं ।

जैविक खेती पर इस संस्थान में मिलता है मुफ्त प्रशिक्षण, घर बैठे शुरू हो जाती है कमाई

जैविक खेती पर इस संस्थान में मिलता है मुफ्त प्रशिक्षण, घर बैठे शुरू हो जाती है कमाई

जालंधर में नूरमहल के दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (Divya Jyoti Jagrati Sansthan)ने जैविक खेती की प्रेरणा एवं प्रशिक्षण के पुनीत कार्य में मिसाल कायम की है। बीते 15 सालों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में रत इस संस्थान ने कैसे अपने मिशन को दिशा दी है, कैसे यहां किसानों को प्रशिक्षित किया जाता है, कैसे सेवादार इसमें हाथ बंटाते हैं जानिये।

सफलता की कहानी -

जैविक खेती के मामले में आदर्श नूरमहल के दिव्य ज्योति जागृति संस्थान में जनजागृति एवं प्रशिक्षण की शुरुआत कुल 50 एकड़ की भूमि से हुई थी। अब 300 एकड़ जमीन पर जैविक खेती की जा रही है। अनाज की बंपर पैदावार के लिए आदर्श रही पंजाब की मिट्टी, खेती में व्यापक एवं अनियंत्रित तरीके से हो रहे रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से लगातार उपजाऊ क्षमता खो रही है। जालंधर के नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने इस समस्या के समाधान की दिशा में आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है।

गौसेवा एवं प्रेरणा -

संस्थान में गोसेवा के साथ-साथ पिछले 15 सालों से किसानों को जैविक खेती के लाभ बताकर प्रेरित करने के साथ ही प्रशिक्षित किया जा रहा है। संस्थान की सफलता का प्रमाण यही है कि साल 2007 में 50 एकड़ भूमि पर शुरू की गई जैविक कृषि आधारित खेती का विस्तार अब 300 एकड़ से भी ज्यादा ऊर्जावान जमीन के रूप में हो गया है। यहां की जा रही जैविक खेती को पर्यावरण संवर्धन की दिशा में मिसाल माना जाता है। ये भी पढ़ें: देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, 30 फीसदी जमीन पर नेचुरल फार्मिंग की व्यवस्था

सेवादार करते हैं खेती -

संस्थान के सेवादार ही यहां खेती-किसानी का काम संभालते हैं। किसान एवं पर्यावरण के प्रति लगाव रखने वालों को संस्थान में विशेष कैंप की मदद से प्रशिक्षित किया जाता है। गौरतलब है कि गौसेवा, प्रशिक्षण के रूप में जनसेवा एवं जैविक कृषि के प्रसार के लिए प्रेरित कर संस्थान प्रकृति संवर्धन एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में अतुलनीय योगदान प्रदान कर रहा है।

रासायनिक खाद के नुकसान -

संस्थान के सेवादार शिविरों में इस बारे में जागरूक करते हैं कि रासायनिक खाद व कीटनाशक से लोग किस तरह असाध्य बीमारियों की चपेट में आते हैं। इससे होने वाली शुगर असंतुलन, ब्लड प्रेशर, जोड़ दर्द व कैंसर जैसी बीमारियों के बारे में लोगों को शिविर में सावधान किया जाता है। ये भी पढ़ें: जैविक खेती में किसानों का ज्यादा रुझान : गोबर की भी होगी बुकिंग यहां लोगों की इस जिज्ञासा का भी समाधान किया जाता है कि जैविक खेती के कितने सारे फायदे हैं। जैविक कृषि विधि से संस्थान गेहूं, धान, दाल, तेल बीज, हल्दी, शिमला मिर्च, लाल मिर्च, कद्दू, अरबी की खेती कर रहा है। साथ ही यहां फल एवं औषधीय उपयोग के पौधे भी तैयार किए जाते हैं।

गोमूत्र निर्मित देसी कीटनाशक के फायदे -

संस्थान के सेवादार फसल को खरपतवार और अन्य नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों से बचाने के लिए खास तौर से तैयार देसी कीटनाशक का प्रयोग करते हैं। इस स्पेशल कीटनाशक में भांग, नीम, आक, गोमूत्र, धतूरा, लाल मिर्च, खट्टी लस्सी, फिटकरी मिश्रण शामिल रहता है। इसका घोल तैयार किया जाता है। फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए जैविक कृषि के इस स्पेशल स्प्रे का इस्तेमाल समय-समय पर किया जाता है। ये भी पढ़ें: गाय के गोबर से बन रहे सीमेंट और ईंट, घर बनाकर किसान कर रहा लाखों की कमाई

जैविक उत्पाद का अच्छा बाजार -

जैविक उत्पादों की बिक्री में आसानी होती है, जबकि इसका दाम भी अच्छा मिल जाता है। इस कारण संस्थान में प्रशिक्षित कई किसान जैविक कृषि को आदर्श मान अब अपना चुके हैं। जैविक कृषि आधारित उत्पादों की डिमांड इतनी है कि, लोग घर पर आकर फसल एवं उत्पाद खरीद लेते हैं। इससे उत्पादक कृषक को मंडी व अन्य जगहों पर नहीं जाना पड़ता।

पृथक मंडी की दरकार -

यहां कार्यरत सेवादारों की सलाह है कि जैविक कृषि को सहारा देने के लिए सरकार को जैविक कृषि आधारित उत्पादों के लिए या तो अलग मंडी बनाना चाहिए या फिर मंडी में ही विशिष्ट व्यवस्था के तहत इसके प्रसार के लिए खास प्रबंध किए जाने चाहिए। ये भी पढ़ें: एशिया की सबसे बड़ी कृषि मंडी भारत में बनेगी, कई राज्यों के किसानों को मिलेगा फायदा संस्थान की खास बात यह है कि, प्रशिक्षण व रहने-खाने की सुविधा यहां मुफ्त प्रदान की जाती है। संस्थान की 50 एकड़ भूमि पर सब्जियां जबकि 250 एकड़ जमीन पर अन्य फसलों को उगाया जाता है।

कथा, प्रवचन के साथ आधुनिक मीडिया -

अधिक से अधिक लोगों तक जैविक कृषि की जरूरत, उसके तरीकों एवं लाभ आदि के बारे में उपयोगी जानकारी पहुंचाने के लिए संस्थान धार्मिक समागमों में कथा, प्रवचन के माध्यम से प्रेरित करता है। इसके अलावा आधुनिक संचार माध्यमों खास तौर पर इंटरनेट के प्रचलित सोशल मीडिया जैसे तरीकों से भी जैव कृषि उपयोगिता जानकारी का विस्तार किया जाता है। संस्थान के हितकार खेती प्रकल्प में पैदा ज्यादातर उत्पादों की खपत आश्रम में ही हो जाती है। कुछ उत्पादों के विक्रय के लिए संस्थान में एक पृथक केंद्र स्थापित किया गया है।

गोबर, गोमूत्र आधारित जीव अमृत -

जानकारी के अनुसार संस्थान में लगभग 900 देसी नस्ल की गायों की सेवा की जाती है। इन गायों के गोबर से देसी खाद, जबकि गो-मूत्र से जीव अमृत (जीवामृत) निर्मित किया जाता है। इस मिश्रण में गोमूत्र, गुड़ व गोबर की निर्धारित मात्रा मिलाई जाती है। गौरतलब है कि गोबर के जीवाणु जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस नंबर पर फोन करके जान सकते हैं किसान सम्मान निधि योजना का स्टेटस

इस नंबर पर फोन करके जान सकते हैं किसान सम्मान निधि योजना का स्टेटस

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan) केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए लाभकारी योजनाओं में से एक है, इस योजना का उद्देश्य भूमि धारक किसानों के परिवारों को कृषि के क्षेत्र में कार्य करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करनी है। इस योजना का लाभ काफी संख्या में किसान ले रहे हैं। योजना के अंतर्गत भूमि धारक किसानों के परिवारों को ₹6000 प्रति वर्ष का वित्तीय लाभ दिया जाता है, जो हर 4 महीने में ₹2000 की तीन किस्तों में मिलता है।


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सरकार ने जारी किया है टॉल फ्री नंबर

इस योजना के एप्लीकेशन स्टेटस को जानने के लिए सरकार ने एक टोल फ्री नंबर जारी किया है जिस पर किसान कॉल करके अपने आवेदन की स्थिति को जान सकता है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को सरकार ने 11 किस्तों की राशि का भुगतान कर दिया है। वहीं 12वीं किस्त की राशि भुगतान करने से पहले सरकार ने EKYC कराना जरूरी कर दिया है। जिन किसानों के द्वारा EKYC नहीं कराया गया है, उनके खाते में 12वीं किस्त का भुगतान नहीं किया जाएगा। ऐसा सरकार ने हाल ही के दिनों में नियम बनाया है। ऐसा नियम बनाने का कारण यह है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना मेंलगातार फर्जीवाड़े की खबर सामने आ रही थी। योजना के लिए अपात्र लोग भी इसका फायदा ले रहे थे। यूपी में व्यापक पैमाने पर फर्जीवाड़ा हो रहा था। ज्ञात हो कि पिछले दिनों लगभग 21 लाख लोगों को यूपी सरकार के द्वारा अपात्र चिन्हित किया गया है।


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जो इस योजना का लाभ ले रहे थे इस योजना का लाभ परिवार के सिर्फ एक ही सदस्य के द्वारा लिया जा सकता है लेकिन उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे अन्य राज्यों में इस योजना में लगातार फर्जीवाड़ा का मामला सामने आ रहा था। वैसे लोग जो इनकम टैक्स पे करते हैं वह भी इस योजना का लाभ ले रहे थे। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जो भी अपात्र लोग इस योजना का लाभ ले रहे थे उन पर सरकार कड़ी कार्रवाई करते हुए अभी तक जितनी भी राशि का भुगतान हुआ है उसकी रिकवरी करेगी साथ ही योजना में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने 12वीं किस्त पर रोक लगाते हुए EKYC कराना जरूरी कर दिया है। जो किसान EKYC नहीं कराए हैं उनके खाते में 12वीं किस्त की राशि नहीं जाएगी। कृषि मंत्रालय ने ट्वीट करके यह जानकारी दिया है की, टोल फ्री नंबर 155261 पर किसान फोन करके अपने आवेदन की स्थिति के साथ ये पता लगा सकते हैं कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी सूची में उनका नाम है या नही, दरअसल सरकार के द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लिए ईकेवाईसी कराने की अंतिम तिथि ३१ जुलाई तक ही थी, जिसे ३१ अगस्त तक बढ़ाया गया था। ३१ अगस्त से पहले जिन किसानों ने अपना एक केवाईसी करा लिया है, उन किसानों के खाते में 12वीं किस्त की राशि का भुगतान किया जाएगा।जो किसान इस योजना का लाभ भविष्य में लेना चाहते है उन्हे अपने नजदीकी सीएससी केंद्र पर जाकर EKYC को करना होगा, उसके बाद सरकार के द्वारा जारी किए गए टोल फ्री नंबर पर कॉल करके किसान अपने आवेदन की स्थिति और लाभार्थी सूची में नाम है या नहीं इसका घर बैठे पता लगा पाएंगे। वहीं जिन किसानों का लाभार्थी सूची में नाम है, उनके लिए खुशी की खबर यह है कि उनके खाते में जल्दी 12वीं किस्त की राशि का भुगतान होना है। खबर आ रही है की सरकार ने 12वीं किस्त को लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर करने के लिए इस योजना के लिए करीब 21000 करोड़ के बजट की घोषणा की है।


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12वीं किस्त की स्थिति की जांच कैसे करें

12 वीं किस्त की अपडेट के लिए आपको सबसे पहले प्रधानमंत्री किसान योजना की वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाना होगा। वहां स्क्रीन पर दिख रहे PM Kisan Yojana 12th Kist Status Online 2022 पर क्लिक करना होगा, उसके बाद आपको अपना लॉगिन डिटेल सबमिट करना होगा और ओटीपी पाने के लिए मोबाइल नंबर देना होगा। उसके बाद आपके इस स्क्रीन पर 12वीं किस्त की स्थिति दिखने लगेगी, वहां आपके खाते में 12वीं किस्त की राशि आई है या नहीं यह जान पाने में आप सक्षम होंगे।
अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से नहीं जुड़े हैं? फौरन करें ये काम

अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से नहीं जुड़े हैं? फौरन करें ये काम

देश के किसानों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत हर लाभुक को एक साल में 6 हजार रुपये दिये जाते हैं। इस सूची की हर महीने स्क्रूटनी की जा रही है। अयोग्य लोगों के नाम सूची से काट कर उनसे वसूली भी की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस देश में कई क्रांतिकारी योजनाएं लागू कीं। इनमें आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना प्रमुख हैं। एक तरफ आयुष्मान भारत हेल्थ सेक्टर की दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्कीम है। तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना दुनिया की सबसे कल्याणकारी योजना है, जिसमें गरीब किसानों को प्रति चार माह में 2000 रुपये की मदद राशि दी जाती है। मकसद साफ है, देश का किसान खुशहाल रहे, उसे भूखमरी का शिकार न होना पड़े। वह खेती न छोड़े, यह योजना तीन साल से चल रही है। अगर आप किन्हीं कारणों से अब तक इस योजना का लाभ न ले पाएं हों तो इस लेख को गौर से पढ़ें।


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योग्यता

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में वही हिस्सा ले सकता है, जो मूलतः किसान हो, उसके पास दो हेक्टेयर से ज्यादा भूमि न हो, जमीन के कागजात जिनके नाम पर हों, वही इस योजना का लाभ ले सकते हैं, आधार कार्ड होना अनिवार्य है। जो पता आप दे रहे हैं, (आधार न होने की स्थिति में) उसका सुबूत देना होगा बैंक खाता होना अत्यावश्यक है।

कैसे करें आवेदन

इस योजना का लाभ लेने के लिए आपको बहुत भटकने की जरूरत नहीं है, आप इस योजना की आधिकारिक वेबसाइट (https://pmkisan.gov.in/) पर जाएं और जो-जो उसमें जरूरतें मांगी गई हैं, उन्हें पूरा करें। जब आप सफलतापूर्वक उसे पूर्ण कर लेंगे तो आपको एक संवाद मिलेगा। यह संवाद आपके मोबाइल और मेल आईडी पर आएगा, आपके बैंक को वेरीफाई किया जाएगा। इस प्रोसेस को पूरा करने के बाद आप प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के पात्र हो जाएंगे।

फ्राड से बचें

साल के 6000 रुपये के लिए भी भारत में फ्राड हो रहा है। कई किसान ऐसे हैं (जो वास्तव में किसान नहीं हैं) जो फर्जी नाम-पता-मोबाइल नंबर डाल कर पंजीकरण करा लेते हैं। हर साल 6000 रुपये का लाभ ले लेते हैं, अब ऐसे लोगों को सरकार खोज-खोज कर निकाल रही है। अकेले यूपी में ही 22 लाख से ज्यादा फर्जी किसान पकड़े हैं, इन सभी को अब कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, वसूली हो रही है सो अलग।

कल्याण के लिए है योजना

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के कल्याण के लिए है, यह उन किसानों के लिए है, जो बिचारे कम रकबे में खेती करते हैं. परिवार बड़ा है, आमदनी के साधन कम हैं। उन छोटे किसानों को थोड़ा सपोर्ट करने के लिए ये योजना है। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि किसान खुश रहे। रोजमर्रा की उनकी जिंदगी सुचारू रुप से चले। हालांकि, इस योजना का मकसद यह कतई नहीं है, कि आप खेती-बाड़ी छोड़ दें और मात्र 6000 रुपये में अपना गुजारा करने की सोचें, यह होने वाला भी नहीं।
इस राज्य के 21 लाख किसानों का पीएम किसान सम्मान निधि से गायब हुआ नाम

इस राज्य के 21 लाख किसानों का पीएम किसान सम्मान निधि से गायब हुआ नाम

भारत सरकार लगातार प्रयास कर रही है, कि देश में फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सके। इसके लिए भारत सरकार किसानों को हर संभव सहायता प्रदान करती है ताकि किसान मजबूत रहें और अपना पूरा ध्यान उत्पादन बढ़ाने में फोकस कर सकें। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने एक योजना शुरू की है, जिसे पीएम किसान सम्मान निधि के नाम से जाना जाता है। इस योजना के अंतर्गत सरकार किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है, ताकि किसान आर्थिक मोर्चे पर मजबूती के साथ खड़े रहें। इस योजना के अंतर्गत किसानों को 2-2 हजार रुपये की किस्तों में साल में तीन बार रुपये प्रदान किए जाते हैं। सरकार का मानना है, कि इससे किसान खेती के लिए अपनी जरूरत की चीजें खरीद सकते हैं। इस सहायता से उनके ऊपर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी।


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अब इस योजना में फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है। जहां कई राज्यों में फर्जी किसान इस योजना के लाभार्थी के तौर पर नामित हैं। इसलिए अब सरकार ऐसे फर्जी किसानों पर एक्शन ले रही है, जिन्होंने अपात्र होते हुए इस योजना के माध्यम से सब्सिडी के पैसे लिए हैं। इस प्रकार का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा अभी तक उत्तर प्रदेश में पकड़ में आया हैं, जहां पर लगभग 21 लाख फर्जी किसान इस योजना का लाभ ले रहे थे। सरकार ने ऐसे फर्जी किसानों को चिन्हित करते हुए उनका नाम पीएम किसान सम्मान निधि से काटना शुरू कर दिया है। पीएम किसान सम्मान निधि की 11वीं किस्त जारी करने के बाद सरकार ने जांच में सख्ती कर दी है। जिसके बाद लाभार्थी किसानों को अपना केवाईसी करवाना अनिवार्य हो गया है। इसके साथ ही सरकार बार-बार किसानों का भू-रिकॉर्ड वेरिफिकेशन और बेनिफिशियरी स्टेटस चेक करवा रही है। अगर उपर्युक्त चीजों में कोई भी चीज गलत पाई जाती है तो किसान का नाम अब पीएम किसान सम्मान निधि से हटाया जा रहा है। जिसके बाद किसान को पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त नहीं मिलेगी।

(E-KYC) ई-केवाईसी और भूमि रिकॉर्ड वेरिफिकेशन कैसे कराएं

जितने भी किसानों का ई-केवाईसी और भूमि रिकॉर्ड वेरिफिकेशन अभी तक नहीं हुआ है, वो किसान अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र, सीएससी सेंटर या फिर साइबर कैफे में जाकर अपना आवेदन कर सकते हैं। यहां बेहद आसानी से उनका केवाईसी अपडेट कर दिया जाएगा। इसके साथ ही किसान भाई भूमि रिकॉर्ड के वेरिफिकेशन के लिए अपने नजदीकी जिले के कृषि विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। वहां अपने जरूरी कागजात देकर सत्यापन करवा सकते है।


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ऐसे किसानों को भेजा जा रहा है नोटिस

ऐसे किसान जो इस योजना के तहत सरकारी सहायता लेने के अपात्र हैं तथा जिन्होंने फर्जी दस्तावेज जमा करके सालाना 6 हजार रुपये प्राप्त किए हैं, ऐसे किसानों की राशि वापस करने का नोटिस भेजा जा रहा है। यदि ऐसे फर्जी किसान समय पर पैसा नहीं लौटाते हैं, तो उन पर कार्यवाही की जाएगी। साथ ही कई बैंकों ने जानकारी पाते ही फर्जी किसानों के बैंक खाते बंद कर दिए हैं।

ऐसे करें पीएम किसान सम्मान निधि योजना का स्टेटस चेक

किसान भाई अपनी पात्रता जानने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं। इस वेबसाइट के होम पेज पर Beneficiary Status का एक विकल्प दिखाई देगा, इस विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद पेज पर अपनी पंजीकरण संख्या दर्ज करें। पंजीकरण संख्या दर्ज करने के बाद अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें और कैप्चा कोड भरें। उसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा, उसे दर्ज करें। ओटीपी दर्ज करने के साथ ही गेट डिटेल पर क्लिक करने के बाद आपका पीएम किसान सम्मान निधि योजना का स्टेटस खुल जाएगा। इस प्रक्रिया से किसान भाई अपना स्टेटस आसानी से चेक कर सकते हैं।
जानें पीएम किसान योजना जी 13 वीं किस्त कब तक आएगी

जानें पीएम किसान योजना जी 13 वीं किस्त कब तक आएगी

किसानों को पीएम किसान योजना की 13 वीं किस्त की बेहद उत्सुकता से प्रतीक्षा है। किसानों को अनुमान है, शायद इस हफ्ते उनकी 13 वीं किस्त उनके खाते में डाल दी जाएगी। केंद्र सरकार भी 13 वीं किस्त किसानों के खाते में भेजने हेतु पूर्ण व्यवस्था में लगी हुई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 12वीं किस्त किसानों को मिल चुकी है। किसान वर्तमान में 13 वीं किस्त की प्रतीक्षा में बैठे हैं। आखिर कब तक उनको 13 वीं किस्त मिलेगी। इस बात के लिए किसान सड़कों पर निरंतर बातचीत में लगे हुए हैं। किसानों द्वारा केंद्र सरकार से भी अनुग्रह किया जा रहा है, कि वह इसी माह में शीघ्र से शीघ्र उनके खाते में 13 वीं किस्त ड़ाल दें।

किसानों को कब तक 13 वीं किस्त मिल सकती है

अगर जनवरी माह में 13 वीं किस्त किसानों को कब तक मिलेगी। किसान इस विषय पर निरंतर चर्चा कर रहे हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक, लोहड़ी एवं मकर संक्राति के त्यौहार से पूर्व किस्त किसानों को मिलने की आशा की जा रही थी। परंतु, फिलहाल जो खबरें देखने को मिल रही हैं। उनके मुताबिक तो आने वाले हफ्ते में अथवा जनवरी माह के किसी भी दिन किसानों के खातों में पहुँचा दी जा सकती है। केंद्र सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, किसानों को चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। केंद्र सरकार निर्धारित समय पर 13 वीं किस्त किसानों के खाते में भेज देगी। दरअसल, केंद्र सरकार की तरफ से किस्त जारी करने के संबंध में कोई अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन, इसी हफ्ते अथवा 26 जनवरी से पूर्व किसानों के खातों में उनकी 13 वीं किस्त आने की संभावना है।


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किसानों को ऑनलाइन तौर पर इस कार्य को करना अति आवश्यक है

पीएम किसान योजना की आगामी किस्त प्राप्त करने हेतु कृषकों को ई-केवाईसी होनी आवश्यक है। जिसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना भी बेहद आवश्यक होता है। पंजीयन करते समय राशन कार्ड का सॅाफ्ट कार्ड जमा करना होगा। आपको हार्ड कॉपी जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप इसके लिए पीएम किसान पोर्टल की अधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें। वेबसाइट पर आपको राशन कार्ड की PDF फाइल तैयार कर अपलोड करदें। यदि किसानों ने राशन कार्ड की कॉपी जमा नहीं की तो उस स्थिति में किसान किस्त से वंचित रह जाएंगे।

आधार कार्ड का बैंक खाते से जुड़े रहने की स्थिति में ही मिल पायेगा लाभ

केंद्र सरकार के निर्देशानुसार आधार कार्ड को बैंक से जोड़ना बहुत आवश्यक कर दिया है। बैंक से आधार कार्ड जुड़ने की स्थिति में आपकी ई-केवाईसी पूर्ण हो जाएगी। केंद्र सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, किस्त प्राप्त करने हेतु किसानों का आधार कार्ड बैंक से जुड़ा होना चाहिए। उसके उपरांत ही 13 वीं किस्त किसानों को मिल सकेगी। बतादें, कि अपात्र एवं E-KYC नहीं होने की वजह से 2 करोड़ से ज्यादा किसानों के खाते में 12 वीं किस्त नहीं पहुँच पायी थी। वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा पात्र किसानों को ई-केवाईसी कराने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। जिससे कि वह पीएम किसान योजनासे लाभान्वित हो सकें।
पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त 6 हजार से 8 हजार होने की आशंका है

पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त 6 हजार से 8 हजार होने की आशंका है

भारत में पीएम किसान योजना के 1.86 करोड़ लाभार्थी किसान पहले वंचित कर दिया है। सरकार के जरिए किए जाने वाले सत्यापन के अंतर्गत पुनः अपात्र किसानों की जाँच पड़ताल की जा रही है। निरंतर लाभार्थी सूची को बेहतर करने का कार्य चल रहा है। इस वजह से यदि आप भी लाभार्थी हैं, तब आपको सूची में स्वयं का नाम एवं स्टेटस की जाँच करना बेहद जरुरी है। केंद्र सरकार द्वारा लघु एवं सीमांत किसानों के हित में सुचारु प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंदर उच्च स्तर का परिवर्तन होने की आशंका प्रतीत हो रही है। आपको बतादें कि सरकार 1 फरवरी को प्रस्तुत होने वाले बजट में भी सम्मान निधि की धनराशि में बढ़ोत्तरी का अंदाजा लगाया जा रहा है। लेकिन उसके पूर्व 29 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का 'मन की बात' कार्यक्रम प्रसारित होना है। इसके अंतर्गत किसान व कृषि से संबंधित लोगों हेतु बड़ी सूचना हो सकती है। हम यह कह सकते हैं, कि देश के किसानों को सरकार से बेहद आसा है। पीएम किसान योजना की 13 वीं किस्त आने से पूर्व सरकार की सूचना स्पष्ट हो जाएगी।
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हालाँकि, वर्तमान में लाभार्थी सूची के अंदर बड़ा परिवर्तन होने की संभावना खबरों के जरिए से सुनने को मिल रही हैं। बतादें, कि बड़ी तादात में किसानों द्वारा ई-केवाईसी (E-KYC) एवं भूआलेखों का सत्यापन नहीं कराया है। राज्य सरकारों द्वारा 13 वीं किस्त भेजने से पूर्व दोनों प्रमाणीकरण विधि को पूर्ण कराने हेतु निर्देश जारी किए गए हैं। निरंतर, यह बात खबरों के माध्यम से प्राप्त हो रही है, कि जिन किसानों ने अभी तक सत्यापन की प्रक्रिया को पूर्ण नहीं किया है। उस स्थिति में ऐसे किसानों को लाभार्थी सूची से वंचित किया जा सकता है।

किसान पीएम किसान योजना के लिए लाभार्थी सूची की जाँच अवश्य करें

निरंतरता से किसानों के ई-केवाईसी एवं भूआलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया तीव्रता से चल रही है। योजना हेतु पात्र किसानों का स्टेटस संशोधित होने का कार्य चल रहा है। वहीं, अपात्र-लाभार्थियों की जाँच होते ही उनका नाम सूची से हटा दिया जा रहा है। अगर आपने भी हाल ही में प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूर्ण की है। तो आपको अपना नाम लाभार्थी सूची में देख लेना चाहिए।
  • आप सर्वप्रथम pmkisan.gov.in पर विजिट करें।
  • होम पेज उपलब्ध Farmers Corner के विभाग पर पहुँचे।
  • आपको यहां Beneficiary Status के विकल्प पर क्लिक करना है ।
  • जो आपका पंजीकृत मोबाइल नंबर अथवा पंजीयन नंबर डालकर किसान भाई सूची में स्वयं के नाम की जाँच कर सकते हैं।

किसान सूची में नाम परिवर्तन की जानकारी हेतु क्या करें

बहुत बार ई-केवाईसी (E-KYC) एवं भुआलेख प्रमाणीकरण के उपरांत भी किसान का नाम सूची में अपडेट नहीं हो पाया है। उस परिस्थिति में इस तरह की तकनीकी कमियों को ठीक करने हेतु हेल्प डेस्क से संपर्क किया जा सकता है। कृषि मंत्रालय द्वारा किसानों हेतु हेल्पलाइन नंबर भी लागू किए गए हैं। यदि किसान चाहें तो 1551261 या 1800115526 या 011-23381092 पर भी कॉल कर स्वयं की शंका का निराकरण प्राप्त कर सकते हैं। किसान स्वयं की दिक्क्त परेशानी को pmkisan-ict@gov.in पर लिखकर भी मेल किया जा सकता है।

किसानों को पीएम योजना की किस्त 8,000 रुपये होने की बात सच या झूंठ

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत लाभार्थी किसानों के बैंक खाते में वार्षिक 6,000 रुपये की धनराशि आर्थिक सहायता के अनुरूप हस्तांतरित की जाती है। सरकार द्वारा इस धनराशि दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में किसानों को भेजी जाती है। वर्तमान में 1 फरवरी को प्रस्तुत होने वाले बजट से पूर्व आशंका लगाई जा रही हैं, कि यह धनराशि 6,000 रुपये से वृद्धि होकर 8,000 रुपये तक होने की संभावना है। यह इस वजह से भी मुमकिन है, कि जांच पड़ताल के अंतर्गत बहुत सारे अपात्र लोग गलत रूप से पीएम किसान की किस्तें प्राप्त कर रहे थे।
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अब उनको सूची से बाहर कर दिया है। लाभार्थियों के सत्यापन के चलते अपात्र किसानों की पहचान करके उनको योजना से वंचित किया जा रहा है। नतीजतन, संभावना है, कि योजना के बजट में अतिरक्त वृद्धि करके किसानों को मिल रही आर्थिक सहायता की धनराशि में भी बढ़ोत्तरी करदी जाएगी। हालांकि, फिलहाल आधिकारिक तौर पर इस प्रकार की कोई भी सूचना जारी नहीं हुई है।
3 लाख किसान महिलाओं के खाते में 54,000 करोड़ रुपये भेज किया आर्थिक सशक्तिकरण

3 लाख किसान महिलाओं के खाते में 54,000 करोड़ रुपये भेज किया आर्थिक सशक्तिकरण

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पीएम किसान योजना के अंतर्गत महिलाओं की हिस्सेदारी के विषय में चर्चा की है। उनका कहना है कि भारत की लगभग 3 लाख महिला किसानों को 54,000 करोड़ रुपये डीबीटी के जरिए हस्तांतरित कर दिए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बजट सत्र-2023-24 के शुभारंभ में अपने एक संबोधन में बताया था, कि भारत के 11 करोड़ छोटे किसानों को सरकार प्राथमिकता दे रही है। जो दशकों से लाभ से दूर थे। इन किसानों का सशक्तिकरण किया जा रहा है। जिससे कि वह मजबूत हो सकें। 

देश की 3 लाख महिला किसानों को दिया फायदा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को दिसंबर 2018 में जारी किया गया था। परंतु, फरवरी 2019 से ही सम्मान निधि की किस्तों का अंतरण शुरू हुआ है। इस योजना के लाभार्थी किसानों को सरकार वार्षिक 6,000 रुपये की आर्थिक सहायक धनराशि प्रदान करेगी। यह धनराशि दो-दो हजार रुपये की 3 किस्तों के अंदर प्रत्येक चार माह की समयावधि में सीधे किसानों के बैंक खाते में हस्तांतरित कर दी जाती है। अब तक 2.25 लाख करोड़ रुपये किसानों को प्राप्त हो गए हैं। इन लाभार्थियों के अंदर 3 लाख महिला किसान भी शम्मिलित हैं, जिनको 54,000 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी जा चुकी है।

सरकार द्वारा चलाईं गई किसान हित में योजनाएं

अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बताया है, कि केंद्र सरकार की तरफ से किसानों के हित में विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस योजना के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड शामिल हैं। इन समस्त योजनाओं का लाभ पशुपालकों एवं मछली पालकों को भी दिया जा रहा है। नतीजतन, इसकी वजह से छोटे किसानों को भी बल मिल पाएगा। इनको और भी ज्यादा मजबूती प्रदान करने के लिए किसान उत्पादन संगठनों के गठन से लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने तक का निर्णय लिया गया है। 

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जानें पहली किस्त से बारहवीं किस्त तक का ब्यौरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह भी कहा है, कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की प्रथम किस्त के समय 3.16 करोड़ लाभार्थियों को फायदा हुआ था। वहीं दूजी किस्त में 6.63 करोड़, तीसरी किस्त में 8.76 करोड़, चौथी किस्त में 8.96 करोड़, पांचवी किस्त 10.49 करोड़, छंटवी किस्त में 10.23 करोड़, सातवीं किस्त में 10.23 करोड़, आठवीं किस्त में 11.16 करोड़, नौंवी किस्त में 11.19 करोड़, दसवीं किस्त में 11.16 करोड़, 11वीं किस्त में 11.27 करोड़ और 12वीं किस्त में 8.99 करोड़ रुपये के लगभग सहायक धनराशि अंतरित करदी गई है। राष्ट्रपति मुर्मू जी का कहना है, कि पीएम किसान एक केंद्रीय योजना है, जो केंद्र सरकार द्वारा 100 फीसद वित्त पोषित हैं। इस योजना हेतु राज्य सरकारें एवं केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन ऐसे किसान परिवारों की जाँच करते हैं, जो कि योजना के नियम के आधार पर मदद के पात्रता रखते हैं।

किसानों के टूटे सपने, सरकार ने फेरा पानी

किसानों के टूटे सपने, सरकार ने फेरा पानी

जब से नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला है, तब से उन्होंने गरीब किसानों के लिए एक से बढ़कर के योजनओं को धरातल में उतारा है. जिसमें पीएम किसान योजना सम्मान निधि योजना भी शामिल है. बता दें पीएम किसान योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को एक साल में 6000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है. किसानों को यह राशि कुल तीन किस्तों में दी जाती है. जिसके बाद किसानों की सरकार की तरफ आस और बढ़ गयी है और वो इस राशि में बढ़ोतरी का इन्तजार कर रहे हैं. क्या किसानों का यह इंताजर खत्म होगा? क्या पीएम किसान की राशि में बढ़ेगी? इन्हीं संसयों को खत्म करते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ा झटका दे दिया है. दरअसल केंद्र सरकार ने संसद भवन में इस बात को स्पष्ट करते हुए यह साफ कर दिया है कि, पीएम किसान निधि योजना की राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी और ना ही इसे जुड़ा कोई प्रस्ताव है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में मामले से जुड़ा लिखित जवाब भी पेश किया. जिसमें उन्होंने साफतौर पर लिखा है कि पीएम किसान योजना की जो भी मौजूदा राशि है उसमें किसी तरह का बदलाव या बढ़ाने से जुड़ा कोई प्रस्ताव नहीं है. ये भी देखें: जानें पीएम किसान योजना जी 13 वीं किस्त कब तक आएगी जानकारी के लिए बता दें कि, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को साल 2019 फरवरी में लॉन्च किया था. लेकिन साल 2018 दिसंबर में ही यह योजना लागू हो चुकी थी. इस योजना के अंतर्गत जो भी किसान पात्र हैं, उन्हें हर चार महीने में दो-दो हजार रुपये दिया जाएगा. जोकि हर साल छह हजार रुपये का वित्तीय लाभ बनता है. इस राशि को सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है. इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने खुद साल 2022 में पीएम किसान की 12वीं किस्त जारी की थी. जिसमें 16 हजार करोड़ रुपयों का खर्चा केंद्र सरकार की ओर से किया गया था. वहीं अब किसानों को 13वीं किस्त का इंतजार है. जिसके बाद ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि सरकार इस महीने के आखिर तक 13वीं किस्त जारी कर सकती है.
पोस्ट ऑफिस ने चलाई योजना, किसानों को मिलेगा लाभ

पोस्ट ऑफिस ने चलाई योजना, किसानों को मिलेगा लाभ

शहरों के मुकाबले, गांव की अर्थव्यवस्था एक दूसरे से काफी अलग होती है. गांव के लोग खेती, किसानी और पाशुपालन जैसे काम करके अपनी आजीविका चलाते हैं. ऐसे सरकार उनकी आबादी की आय और कई तरह की सुविधाएं देने की लिए योजनाएं बना रही है. जिनके चलते ग्रामीण किसान अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें. इसी के तर्ज पर काफी लोग कई जगह निवेश करते हैं. लेकिन बात पोस्ट ऑफिस की करें, तो इसकी कुछ योजनाएं पैसों को बढ़ाने में मदद कर रही हैं. पोस्ट ऑफिस ग्राम सुरक्षा योजना भी इसी योजना का हिस्सा है. जो खास तौर पर ग्रामीण आबादी के लिए ही चलाई जा रही है. इस योजना के तहत लाभार्थियों को सिर्फ 50 रुपये रोज के हिसाब से निवेश करना होगा. हालांकि यह पैसा हर दिन नहीं देना होगा. बल्कि हर महीने एक मुश्त 15 सौ रुपये जमा करने होंगे. जिसके बदले एन निश्चित समय के बाद 35 लाख रुपये का रिटर्न मिल सकता है.

कैसे मिलता है योजना का लाभ?

19 साल की उम्र से लेकर 35 साल की उम्र तक कोई भी पोस्ट ऑफिस ग्राम सुरक्षा योजना में आवेदन कर सकता है. इस स्कीम के तहत 10 हजार से लेकर 10 लाख रुपये का निवेश करने की सहूलियत दी जाती है. अगर आप चाहें तो इसे महीने से लेकर तिमाही, छमाई या फिर हर साल भी निवेश कर सकते हैं. ये भी देखें:
जनधन योजना की खाताधारक महिलाओं को तीन माह तक 500 रुपए की मदद इसके अलावा हर रोज 50 रुपये या फिर महीने में 15 सौ रुपये का आंशिक निवेश करना होता है. उसके बाद आपको 31 से 35 लाख तक का रिटर्न मिल सकता है. इंवेस्ट करने वाले लाभार्थी की मौत अगर 80 साल की उम्र में होती है, तो बोनस के साथ पूरा पैसा उसके लाभार्थी को मिल सकता है.

चार साल तक निवेश पर लोन की सुविधा

पोस्ट ऑफिस ग्राम सुरक्षा योजना के तहत निवेश करने वाले लाभार्थी को चार साल तक निवेश करने पर लोन की सुविधा भी दी जाती है. अगर लाभार्थी लगातार पांच साल तक इंवेस्ट करता है, तो उसे बोनस मिलना शुरू हो जाता है. वहीं अगर लाभार्थी बीच में ही इसे छोड़ना चाहे तो तारीख के तीन साल बाद इस सुविधा का फायदा उठाना चाहिए.

पैसे मिलने की पॉलिसी

जो भी लाभार्थी पोस्ट ऑफिस ग्राम सुरक्षा योजना के तहत निवेश करेंगे उन्हें उनकी 80 साल की उम्र पूरी करते ही पॉलिसी की पूरी रकम सौंप दी जाएगी. नियमों के मुताबिक 55 साल के निवेश पर 31 लाख 60 हजार रुपये, ५८ साल में 33 लाख 40 हजार और ६०साल पर 34 लाख 60 हजार रुपयों का लाभ दिया जाएगा. अगर आप भी इस योजना का लाभ पाना चाहते हैं तो www.indiapost.gov.in यहां पर संपर्क कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत दी जाएगी किसानों को पेंशन; जाने क्या है स्कीम

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत दी जाएगी किसानों को पेंशन; जाने क्या है स्कीम

भारत सरकार किसानों के कल्याण के लिए समय-समय पर कई तरह की योजनाएं चलाती रहती है. अभी भी सरकार द्वारा किसानों के हित का ध्यान रखते हुए पीएम किसान सम्मान निधि, किसान समृद्धि केंद्र, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना समेत कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही है. 

हम सभी जानते हैं कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल ₹6000 दिए जाते हैं जो उन्हें ₹2000 की किस्त में तीन बार खाते में दिए जाते हैं. 

सरकार द्वारा किसानों को उनके बुढ़ापे के दौरान मदद करने के लिए एक पेंशन स्कीम भी चलाई जा रही है. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत किसान सरकार से पेंशन ले सकते हैं.

क्या है प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना?

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना सरकार के द्वारा चलाई गई योजना है जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए चालू की गई है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य बुढ़ापे में किसानों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देना है. 

18 से 40 साल की उम्र के किसान इस योजना के तहत फायदा ले सकते हैं. अगर जमीन की बात की जाए तो 2 हेक्टेयर तक की खेती योग्य भूमि वाले छोटे और सीमांत किसान इस योजना के लिए आवेदन दे सकते हैं. 

इसके अलावा अगर उनके नाम पर राज्य या फिर केंद्र शासित प्रदेशों में किसी भी तरह की भूमिका रिकॉर्ड है तो इस योजना के तहत उन्हें योग्य नहीं माना जाएगा. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अनुसार एक बार किसान जब 60 वर्ष की उम्र पूरी कर लेता है तो उसके बाद उन्हें हर महीने ₹3000 की न्यूनतम पेंशन सरकार द्वारा दी जाएगी.  

इसके अलावा अगर किसी कारण से किसान की मृत्यु हो जाती है तो किसान की पत्नी या फिर परिवार को पेंशन का आधा हिस्सा यानी कि 50% पेंशन मुहैया करवाई जाएगी. सरकार द्वारा दी जाने वाली यह पेंशन केवल पति पत्नी के लिए ही लागू है एक बार किसान की मृत्यु होने पर उसके बच्चे इस योजना के तहत लाभ नहीं उठा सकते हैं. 

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कितने किसान  दे रहे हैं आवेदन?

इस योजना के तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के बीच में किसान आवेदन दे सकता है.  इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए किसानों को 60 साल की उम्र तक हर महीना केवल 55 से ₹200 का योगदान करना होगा. 

एक बार 60 वर्ष का हो जाने के बाद आप इस स्कीम के तहत पेंशन राशि प्राप्त करने के लिए योग्य हो जाते हैं. इसके बाद हर महीने उनके पेंशन खाते में एक निश्चित राशि सरकार द्वारा जमा होती रहेगी. 

इस योजना में सरकार मिलान योगदान देती है. उदाहरण के लिए अगर कोई भी किसान खाते में ₹200 जमा कर रहा है तो सरकार की तरफ से भी उस खाते में ₹200 जमा किए जाएंगे. आंकड़ों की मानें तो अभी तक लगभग 2 करोड़ से ज्यादा किसान प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के विकल्प को चुनने के लिए आवेदन दे चुके हैं

पाइपलाइन की खरीद और वाटर टैंक के निर्माण पर मिल रहा अनुदान, ऐसे करें आवेदन

पाइपलाइन की खरीद और वाटर टैंक के निर्माण पर मिल रहा अनुदान, ऐसे करें आवेदन

राजस्थान के किसानों के लिए सरकार की तरफ से एक और बड़ी खुशखबरी है. बता दें सिंचाई पाइपलाइन और वाटर टैंक निर्माण पर किसानों को भारी अनुदान दिया जा रहा है. गर्मियों के सीजन में किसानों को सबसे ज्यादा फसलों की सिंचाई के लिए पानी की जरूरत पड़ती है. अब ऐसे में उन्हें सिंचाई के लिए पानी की कमी न हो, इसके लिए राजस्थान सरकार ने अच्छी पहल की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब मौसम में बदलाव होने के साथ साथ तापमान भी बढ़ रहा है. जिसे देखते हुए देश के कई राज्यीं में किसानों ने सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था शुरू कर दी है. खेतों में तालाब बनाए जाने के साथ-साथ सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रो की स्थापना की जा रही है. जिससे खपत कम हो और फसलों का उत्पादन ज्यादा हो. राजस्थान सरकार ने किसानों की जरूरतों को देखते हुए वाटर टैंक निर्माण के साथ साथ सिंचाई पाइपलाइन की खरीद पर भारी अनुदान देने का फैसला कर लिया है. बता दें राजस्थान में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है. वहीं धूप और गर्मी की वजह से पानी का स्तर और नीचे चला जाता है. जिससे फसलों का अच्छा उत्पादन नहीं हो पाता. ऐसे में वाटर टैंक और सिंचाई पाइपलाइन से इस परेशानी को दूर करने में मदद मिल सकती है. इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि, इन सब में खर्चे का बोझ अकेले किसानों के कंधे पर नहीं आएगा. सिंचाई पाइपलाइन की खरीद पर 60 फीसद एयर वाटर टैंक निर्माण में 90 हजार रुपये का अनुदान सरकार की ओर से दिया जा रहा है.

सिंचाई पाइपलाइन की खरीद पर मिलेगा इतना अनुदान

राजस्थान के किसानों को सिंचाई पाइपलाइन की खरीद पर राज्य की सरकार ने भरी अनुदान देने का फैसला किया है. इस स्कीम की बात करें तो, इसमें छोटे और बड़े किसानों को सिंचाई के लिए पाइपलाइन की कुल लागत पर करीब 18 हजार या फिर 60 फीसद तक की सब्सिडी दी जाएगी. ये भी पढ़ें:
सिंचाई के लिए नलकूप लगवाने के लिए 3 लाख से ज्यादा की सब्सिडी दे रही है ये सरकार किसानों के अन्य वर्ग की बात करें तो, उनकी लागत में करीब 15 हजार रुपये या 50 फीसद सब्सिडी दी जाएगी. ऐसे में अगर आप राजस्थान के किसान हैं, और इस स्कीम का फायदा लेना चाहते हैं. तो खेती के लायक जमीन अपने नाम होनी जरूरी है. इसके अलावा किसानों के पास और क्या कुछ होना जरूरी है यह भी जान लेना चाहिए.
  • किसानों के पास बिजली, डीजल या फिर ट्रैक्टर से चलने वाला पंप सेट होना जरूरी है.
  • किसानों के पास जरूरी कागजों में आधार कार्ड, जमीन के कागज और सिंचाई पाइपलाइन के बिल होने चाहिए.
  • सिंचाई पाइपलाइन की किसानों की खरीद उसी से करनी होगी, जिसका कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन हो.

वाटर टैंक निर्माण में पर मिलगी इतनी सब्सिडी

राजस्थान में खेती करने वाले लगभग हर तबके के किसानों को करीब 100 घन मीटर या फिर 1 लाख लीटर की क्षमता वाले वाटर टैंक के निर्माण करने पर 90 हजार रुपये का अनुदान सरकार देगी. वहीं किसानों को अगर इस योजना का फायदा लेना है तो, उनका नाम कम से कम आधास हेक्टेयर खेती की जमीन होनी जरूरी है. इसके लिए आवर कौन कौन सी चीजों का होना अनिवार्य है, ये जान लेते हैं.
  • आवेदन करने के लिए किसानों को अपना आधार कार्ड एयर जमीन की जमाबन्दी के कागज जमा करवाने होंगे.
  • किसानों के आवेदन करने बाद ही कृषि विभाग वाटर टैंक निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी करेगा.
  • इससे जुड़ी जानकारी किसानों को जिला कृषि विभाग में मोबाइल पर एसएमएस के जरिये दी जाएगी.

जानिए कैसे करें रजिस्ट्रेशन

अगर कोई किसान वाटर टैंक के निर्माण और सिंचाई पाइपलाइन की खरीद करना चाहता है, तो बता दें कि, इससे जुड़े अनुदान की योजनाएं एक दूसरे से अलग अलग हैं. जिनका लाभ पाने के लिए किसानों को किसान साथी पोर्टल रजिस्ट्रेशन करना होगा. जिसके बाद जिला कृषि विभाग रजिस्ट्रेशन का सत्यापन करेगा. अगर सब कुछ ठीक रहा तो, सरकार अनुदान की राशि सीधा किसानों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करेगी.